नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) सुरक्षा बढ़ाने और फ्राॅड रोकने के उद्देश्य से एक नए अपडेट पर काम कर रहा है, जो आने वाले कुछ हफ्तों में लागू किया जा सकता है।
इस प्रस्तावित अपडेट के तहत उच्च राशि वाले लेनदेन (हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन) के लिए एक अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया जोड़ी जा सकती है। इसमें बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, सेकेंडरी पिन या किसी अन्य सुरक्षा लेयर का उपयोग करना अनिवार्य हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ते डिजिटल फ्राॅड और फिशिंग हमलों को कम करना है।
पिछले एक वर्ष में देशभर में UPI से जुड़े फ्राॅड मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। फिशिंग लिंक, नकली ऐप और रिमोट-एक्सेस सॉफ़्टवेयर के जरिए किए गए घोटालों ने उपभोक्ताओं और बैंकों को चिंता में डाल दिया था। इसी को देखते हुए NPCI सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

हालांकि NPCI की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई प्रमुख फिनटेक कंपनियों ने अपने ऐप्स में नई सुरक्षा सुविधाओं की टेस्टिंग शुरू कर दी है। गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे प्लेटफॉर्म नए दिशा-निर्देश जारी होते ही अपने ऐप के भीतर कुछ बदलाव लागू कर सकते हैं।
सामान्य या छोटे लेनदेन पर इस नए नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन जो उपयोगकर्ता नियमित रूप से बड़े राशि के भुगतान करते हैं, उन्हें ऐप अपडेट करने के साथ अपनी पहचान दोबारा सत्यापित करनी पड़ सकती है।
बैंकों की ओर से इसके लिए विस्तृत परामर्श जल्द जारी किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी ऐसे लिंक या संदेश पर भरोसा नहीं करना चाहिए जो “UPI अपडेट” के नाम पर किसी प्रकार की जानकारी या अनुमति मांगता हो। ऐसे मैसेज अक्सर फ्राॅड का हिस्सा होते हैं।
नए नियम लागू होने की आधिकारिक तारीख आने वाले दिनों में घोषित की जा सकती है। फिलहाल उपयोगकर्ताओं को केवल आधिकारिक स्रोतों पर जारी सूचना पर ही विश्वास करने की सलाह दी जा रही है।